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फेफड़ों का सिकुड़ना, जिसे चिकित्सकीय भाषा में पल्मोनरी कोलैप्स कहा जाता है, दो अलग-अलग रूपों में प्रकट हो सकता है: न्यूमोथोरैक्स (Pneumothorax) और एटेलेक्टेसिस (Atelectasis)। इन दोनों स्थितियों के कारण (एटियलॉजी) और उपचार के तरीके अलग-अलग होते हैं। न्यूमोथोरैक्स, जिसे आमतौर पर फेफड़ों का सिकुड़ना कहा जाता है, तब होता है जब फेफड़ों और छाती की दीवार (प्लूरल स्पेस) के बीच की जगह में हवा लीक हो जाती है। यह अक्सर फेफड़ों की सतह पर एक छोटे हवा के थैले (ब्लेब) के फटने के कारण होता है, जिससे हवा जमा हो जाती है और फेफड़ों पर बाहरी दबाव डालती है, जिससे वे पूरी तरह से फैल नहीं पाते। दूसरी ओर, एटेलेक्टेसिस में, फेफड़े के एक हिस्से या लोब का सिकुड़ना अपर्याप्त हवा के प्रवेश के कारण होता है। यह वायुमार्ग के भीतर रुकावट के कारण हो सकता है, जैसे कि बलगम का प्लग, या ट्यूमर या अन्य द्रव्यमान से बाहरी दबाव के कारण, जो हवा को फेफड़े के विशिष्ट क्षेत्रों तक पहुंचने से रोकता है, जिससे उनका सिकुड़ना होता है।