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एड़ी के स्पर आमतौर पर प्लांटर फैशिया (पैर के तलवे पर एक मोटी ऊतक पट्टी) के खिंचाव या एड़ी की हड्डी को ढकने वाली झिल्ली में सूक्ष्म-आंसुओं के परिणामस्वरूप होने वाली सूजन के कारण होते हैं। यह सूजन कैल्शियम जमा होने का कारण बन सकती है, जो समय के साथ एड़ी के स्पर के रूप में जानी जाने वाली हड्डी की एक उभरी हुई वृद्धि में विकसित होती है।
एड़ी के स्पर के सामान्य योगदानकर्ता कारक और जोखिम कारक इनमें शामिल हैं:
* अत्यधिक तनाव और अति प्रयोग: एड़ी पर बार-बार तनाव डालने वाली गतिविधियाँ, जैसे कठोर सतहों पर दौड़ना या चलना, विशेषकर बिना उचित जूते के, प्लांटर फैशिया को तनावग्रस्त कर सकती हैं। अत्यधिक गतिविधि और लंबे समय तक निष्क्रियता दोनों इसमें योगदान कर सकते हैं।
* पैर की यांत्रिकी और बायोमैकेनिक्स: फ्लैट फीट, हाई आर्च या असामान्य चाल पैटर्न जैसी स्थितियाँ जो एड़ी पर अनुचित दबाव डालती हैं, संवेदनशीलता को बढ़ा सकती हैं।
* अनुचित जूते: पर्याप्त आर्च समर्थन, कुशनिंग की कमी वाले या खराब फिटिंग वाले जूते पहनना (जैसे, कठोर तल वाले जूते, फ्लिप-फ्लॉप का लगातार उपयोग, या गलत एथलेटिक जूते) एड़ी पर तनाव को बढ़ा सकता है।
* वजन और जीवनशैली के कारक: मोटापा या महत्वपूर्ण वजन बढ़ना एड़ी पर भार बढ़ाता है, जिससे प्लांटर फैशिया पर तनाव पड़ता है। लंबे समय तक खड़े रहने की आवश्यकता वाले व्यवसाय भी जोखिम बढ़ाते हैं।
* अंतर्निहित चिकित्सीय स्थितियाँ: मधुमेह और गठिया जैसी कुछ प्रणालीगत बीमारियाँ एड़ी के स्पर के विकास में योगदान कर सकती हैं।
* तीव्र चोटें: एड़ी की हड्डी या आसपास के स्नायुबंधन में सीधा आघात या चोटें भी इस स्थिति को ट्रिगर कर सकती हैं।
एड़ी का दर्द (हील स्पर) क्यों होता है?
एड़ी के स्पर के सामान्य योगदानकर्ता कारक और जोखिम कारक इनमें शामिल हैं:
* अत्यधिक तनाव और अति प्रयोग: एड़ी पर बार-बार तनाव डालने वाली गतिविधियाँ, जैसे कठोर सतहों पर दौड़ना या चलना, विशेषकर बिना उचित जूते के, प्लांटर फैशिया को तनावग्रस्त कर सकती हैं। अत्यधिक गतिविधि और लंबे समय तक निष्क्रियता दोनों इसमें योगदान कर सकते हैं।
* पैर की यांत्रिकी और बायोमैकेनिक्स: फ्लैट फीट, हाई आर्च या असामान्य चाल पैटर्न जैसी स्थितियाँ जो एड़ी पर अनुचित दबाव डालती हैं, संवेदनशीलता को बढ़ा सकती हैं।
* अनुचित जूते: पर्याप्त आर्च समर्थन, कुशनिंग की कमी वाले या खराब फिटिंग वाले जूते पहनना (जैसे, कठोर तल वाले जूते, फ्लिप-फ्लॉप का लगातार उपयोग, या गलत एथलेटिक जूते) एड़ी पर तनाव को बढ़ा सकता है।
* वजन और जीवनशैली के कारक: मोटापा या महत्वपूर्ण वजन बढ़ना एड़ी पर भार बढ़ाता है, जिससे प्लांटर फैशिया पर तनाव पड़ता है। लंबे समय तक खड़े रहने की आवश्यकता वाले व्यवसाय भी जोखिम बढ़ाते हैं।
* अंतर्निहित चिकित्सीय स्थितियाँ: मधुमेह और गठिया जैसी कुछ प्रणालीगत बीमारियाँ एड़ी के स्पर के विकास में योगदान कर सकती हैं।
* तीव्र चोटें: एड़ी की हड्डी या आसपास के स्नायुबंधन में सीधा आघात या चोटें भी इस स्थिति को ट्रिगर कर सकती हैं।