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स्पीच थेरेपिस्ट एएलएस वाले व्यक्तियों को उनकी संचार क्षमताओं को यथासंभव बनाए रखने में मदद कर सकते हैं, जिसमें ऊर्जा-बचत वाली गैर-मौखिक तकनीकें भी शामिल हैं। एएलएस के मरीज अपनी संचार क्षमता को बनाए रखने और सुधारने के लिए निम्नलिखित रणनीतियों का उपयोग कर सकते हैं:
मौखिक संचार को बेहतर बनाने के तरीके:
* शांत वातावरण चुनें।
* धीरे और स्पष्ट रूप से बोलें।
* सुनिश्चित करें कि जिससे आप बात कर रहे हैं वह आपका चेहरा देख सके; अच्छी रोशनी वाले वातावरण में आमने-सामने बातचीत से समझदारी बढ़ती है।
* छोटे वाक्यों का प्रयोग करें; प्रति सांस एक या दो शब्द बोलना आदर्श है।
* लंबी बातचीत के दौरान सहारा प्रदान करने के लिए आरामदायक मुद्रा और स्थिति अपनाएं।
* नियोजित बातचीत या फोन कॉल से पहले आराम की अवधि निर्धारित करें, क्योंकि थकान बोलने की क्षमता को काफी प्रभावित कर सकती है। याद रखें कि सुबह प्रभावी तकनीकें दिन के बाद काम नहीं कर सकती हैं।
* यदि आवाज में भारीपन है, तो आवाज एम्पलीफायर का उपयोग करें।
* वेंटिलेटर का उपयोग करने वाले मरीज वैकल्पिक वायु स्रोत के रूप में इलेक्ट्रोलेरिनक्स या स्पीकिंग वाल्व (ट्रेकियोस्टोमी स्पीकिंग वाल्व) का उपयोग कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण सावधानी: कमजोर मांसपेशियों को मजबूत करने के उद्देश्य से किए गए व्यायाम प्रतिकूल हो सकते हैं। उपयुक्त व्यायामों के संबंध में हमेशा अपने स्पीच थेरेपिस्ट से सलाह लें।
जब मौखिक संचार चुनौतीपूर्ण हो जाए तो अपनाने की रणनीतियाँ:
* लिखना: जो बिना कठिनाई के लिख सकते हैं, उन्हें हमेशा अपने साथ एक अतिरिक्त कागज और कलम रखनी चाहिए। इससे मौखिक रूप से व्यक्त की गई बात समझ में न आने पर लिखित संचार संभव हो जाता है।
* अक्षर बोर्ड का उपयोग करना: जिन्हें लिखने में कठिनाई होती है, वे इच्छित शब्दों के पहले अक्षर को इंगित करने या स्कैन करने के लिए एक अक्षर बोर्ड का उपयोग कर सकते हैं।
* विषय बताना: बातचीत शुरू करने से पहले मुख्य विषय की घोषणा करने से श्रोता को समझने में मदद मिल सकती है।
एएलएस (ALS) के मरीज बात करते समय संचार को आसान बनाने के लिए क्या कर सकते हैं?
मौखिक संचार को बेहतर बनाने के तरीके:
* शांत वातावरण चुनें।
* धीरे और स्पष्ट रूप से बोलें।
* सुनिश्चित करें कि जिससे आप बात कर रहे हैं वह आपका चेहरा देख सके; अच्छी रोशनी वाले वातावरण में आमने-सामने बातचीत से समझदारी बढ़ती है।
* छोटे वाक्यों का प्रयोग करें; प्रति सांस एक या दो शब्द बोलना आदर्श है।
* लंबी बातचीत के दौरान सहारा प्रदान करने के लिए आरामदायक मुद्रा और स्थिति अपनाएं।
* नियोजित बातचीत या फोन कॉल से पहले आराम की अवधि निर्धारित करें, क्योंकि थकान बोलने की क्षमता को काफी प्रभावित कर सकती है। याद रखें कि सुबह प्रभावी तकनीकें दिन के बाद काम नहीं कर सकती हैं।
* यदि आवाज में भारीपन है, तो आवाज एम्पलीफायर का उपयोग करें।
* वेंटिलेटर का उपयोग करने वाले मरीज वैकल्पिक वायु स्रोत के रूप में इलेक्ट्रोलेरिनक्स या स्पीकिंग वाल्व (ट्रेकियोस्टोमी स्पीकिंग वाल्व) का उपयोग कर सकते हैं।
महत्वपूर्ण सावधानी: कमजोर मांसपेशियों को मजबूत करने के उद्देश्य से किए गए व्यायाम प्रतिकूल हो सकते हैं। उपयुक्त व्यायामों के संबंध में हमेशा अपने स्पीच थेरेपिस्ट से सलाह लें।
जब मौखिक संचार चुनौतीपूर्ण हो जाए तो अपनाने की रणनीतियाँ:
* लिखना: जो बिना कठिनाई के लिख सकते हैं, उन्हें हमेशा अपने साथ एक अतिरिक्त कागज और कलम रखनी चाहिए। इससे मौखिक रूप से व्यक्त की गई बात समझ में न आने पर लिखित संचार संभव हो जाता है।
* अक्षर बोर्ड का उपयोग करना: जिन्हें लिखने में कठिनाई होती है, वे इच्छित शब्दों के पहले अक्षर को इंगित करने या स्कैन करने के लिए एक अक्षर बोर्ड का उपयोग कर सकते हैं।
* विषय बताना: बातचीत शुरू करने से पहले मुख्य विषय की घोषणा करने से श्रोता को समझने में मदद मिल सकती है।