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पॉलीन्यूरोपैथी में फिजियोथेरेपी के तरीकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। रोगी की सामान्य स्थिति, लक्षणों, शारीरिक परीक्षण के निष्कर्षों और ईएमजी परिणामों पर सावधानीपूर्वक विचार करते हुए, व्यक्तिगत फिजियोथेरेपी योजनाएं विकसित और लागू की जाती हैं।