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हृदय विफलता का निदान एक व्यापक शारीरिक परीक्षण और रोगी के संकेतों और लक्षणों के सावधानीपूर्वक मूल्यांकन से शुरू होता है। प्रौद्योगिकी में प्रगति विभिन्न उन्नत नैदानिक तरीके प्रदान करती है जो निदान की पुष्टि करने में मदद करते हैं। इन तरीकों में इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी (ईसीजी), इकोकार्डियोग्राफी (कार्डियक अल्ट्रासाउंड), छाती का एक्स-रे, सिंटिग्राफी, एंजियोग्राफी, कार्डियक मैग्नेटिक रेजोनेंस (एमआरआई) और होल्टर मॉनिटरिंग शामिल हैं। हाल के वर्षों में, रक्तप्रवाह में उच्च एनटी-प्रोबीएनपी (NT-proBNP) स्तर जैसे बायोमार्कर ने भी हृदय विफलता के निदान में एक महत्वपूर्ण पूरक भूमिका निभाई है।