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न तो कोल्पोस्कोपी और न ही कोल्पोस्कोपिक बायोप्सी किसी महिला की गर्भधारण करने की क्षमता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। चूंकि बायोप्सी के दौरान लिए गए ऊतक के नमूने काफी छोटे होते हैं, इसलिए इन प्रक्रियाओं का भविष्य की गर्भावस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।